एकीकृत विद्युत विकास योजना - Integrated Power Development Scheme

चर्चा में क्यों?

हाल ही में विद्युत मंत्रालय की एकीकृत विद्युत विकास योजना (Integrated Power Development Scheme- IPDS) के तहत हिमाचल प्रदेश के सोलन में 50 kWp के सोलर रूफटॉप का उद्घाटन किया गया।
  • यह परियोजना शहरी वितरण योजना में परिकल्पित सरकार की 'गो ग्रीन' (Go Green) पहल को और पुष्ट करती है।

प्रमुख बिंदु:

 IPDS के संदर्भ में:
  • शुरुआत: - इसकी शुरुआत दिसंबर 2014 में की गई।
  • नोडल एजेंसी: - विद्युत मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत कार्यरत एक नवरत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम (CPSE), पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Power Finance Corporation Ltd.- PFC) इसके लिये नोडल एजेंसी का कार्य कर रहा है।

    घटक:
  • शहरी क्षेत्रों में सब-ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को मज़बूत करना।
  • शहरी क्षेत्रों में वितरण हेतु ट्रांसफार्मरों/फीडरों/उपभोक्‍ताओं के लिये मीटर लगाना।
  • एंटरप्राइज़ रिसोर्स प्लानिंग (ERP) और वितरण क्षेत्र को सूचना प्रौद्योगिकी में सक्षम करने हेतु योजनाएँ।
  • ERP किसी व्यवसाय के महत्त्वपूर्ण भागों को एकीकृत करने में मदद करती है।
  • राज्यों की अतिरिक्त मांग को शामिल करने के लिये और उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) में प्रदर्शन करने वाले राज्यों हेतु भूमिगत केबलिंग तथा सरकारी भवनों पर स्मार्ट मीटरिंग समाधान तथा नेट-मीटरिंग के साथ सौर पैनल भी योजना के तहत अनुमत हैं।

    उद्देश्य
  • उपभोक्ताओं को 24×7 विद्युत आपूर्ति करना।
  • कुल तकनीकी और वाणिज्यिक (Aggregate Technical and Commercial- AT&C) क्षति में कमी लाना।
  • सभी घरों तक विद्युत की आपूर्ति सुनिश्चित करना।

    योग्यता:
  • सभी विद्युत वितरण कंपनियाँ (डिस्कॉम) इस योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिये पात्र हैं।

    फंडिंग पैटर्न:
  • भारत सरकार द्वारा अनुदान: 60% (विशेष श्रेणी के राज्यों के लिये 85%)।
  • अतिरिक्त अनुदान: 15% (विशेष श्रेणी के राज्यों के लिये 5%) कार्य के अनुसार।

भारत की स्थिति:

  • भारत का विद्युत क्षेत्र विश्व में सबसे विविध क्षेत्रों में से एक है। विद्युत् उत्पादन के स्रोतों की श्रेणी पारंपरिक स्रोतों जैसे- कोयला, लिग्नाइट, प्राकृतिक गैस, तेल, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा से लेकर व्यवहार्य गैर-पारंपरिक स्रोत जैसे- पवन, सौर और कृषि तथा घरेलू कचरे तक है।
  • भारत विश्व में विद्युत् का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है।
  • विद्युत एक समवर्ती सूची (संविधान की सातवीं अनुसूची) का विषय है ।
  • विद्युत मंत्रालय देश में विद्युत ऊर्जा के विकास के लिये प्राथमिक रूप से उत्तरदायी है।
  • यह विद्युत अधिनियम, 2003 और ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 को प्रशासित करता है।
  • सरकार ने वर्ष 2022 तक अक्षय ऊर्जा में 175 गीगावाट क्षमता हासिल करने के लिये अपना रोडमैप जारी किया है, जिसमें 100 गीगावाट सौर ऊर्जा और 60 गीगावाट पवन ऊर्जा शामिल है।
  • सरकार वर्ष 2022 तक रूफटॉप सौर परियोजनाओं के माध्यम से 40 गीगावाट (GW) विद्युत उत्पन्न करने के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु 'रेंट ए रूफ' (Rent a Roof) नीति तैयार कर रही है।
  • नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा से संबंधित सभी मामलों के लिये नोडल मंत्रालय है।
  • विद्युत क्षेत्र में स्वत: मार्ग के तहत 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment- FDI) की अनुमति है।

संबंधित सरकारी पहल:

  • प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य): इसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में देश के सभी इच्छुक घरों का विद्युतीकरण सुनिश्चित करना है।
  • दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (DDUGJY): ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में (a) कृषि और गैर-कृषि फीडरों को अलग करने (b) वितरण ट्रांसफार्मर, फीडर और उपभोक्ता छोर पर मीटरिंग सहित ग्रामीण क्षेत्रों में उप-पारेषण और वितरण बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने और बढ़ाने का प्रावधान है।
  • गर्व (ग्रामीण विद्युतीकरण-GARV) एप: विद्युतीकरण योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता की निगरानी हेतु GARV एप के माध्यम से प्रगति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिये सरकार द्वारा ग्रामीण विद्युत अभियान (GVAs) चलाया गया गया है।
  • उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय): डिस्कॉम के परिचालन और वित्तीय बदलाव के लिये इसकी शुरुआत की गई।
  • संशोधित टैरिफ नीति में '4 ई (4 Es)': 4ई में सभी के लिये विद्युत्, किफायती टैरिफ सुनिश्चित करने की क्षमता, एक स्थायी भविष्य के लिये पर्यावरण, निवेश को आकर्षित करने और वित्तीय व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिये व्यापार करने में आसानी शामिल है।

उपलब्धियाँ:

  • भारत में सौर शुल्क वित्त वर्ष 2015 में 7.36 रुपए प्रति किलोवाट से कम होकर वित्त वर्ष 2020 में 2.63 रुपए प्रति किलोवाट घंटा हो गया है।
  • दिसंबर 2020 तक 36.69 करोड़ से अधिक एलईडी बल्ब, 1.14 करोड़ एलईडी ट्यूबलाइट और 23 लाख ऊर्जा कुशल पंखे पूरे देश में वितरित किये गए हैं, जिससे प्रति वर्ष 47.65 बिलियन kWh ऊर्जा की बचत होती है।
  • नवंबर 2020 की पहली छमाही में भारत की विद्युत खपत 7.8% बढ़कर 50.15 बिलियन यूनिट (BU) हो गई, जो आर्थिक गतिविधियों में सुधार का संकेत है।
  • अप्रैल-सितंबर 2020 में थर्मल स्रोतों से ऊर्जा उत्पादन 472.90 BU रहा।
  • विश्व बैंक की ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस - "गेटिंग इलेक्ट्रिसिटी" रैंकिंग में भारत की रैंक वर्ष  2014 के 137 से वर्ष 2019 में 22 हो गई।
  • 28 अप्रैल, 2018 तक दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (DDUGJY) के तहत शत-प्रतिशत गाँवों का विद्युतीकरण किया जा चुका है।

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