भारतीय अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताएं क्या है

भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं 

 
भारतीय अर्थव्यवस्था-
विकासशील देश विकास की सीढ़ी पर काफी नीचे होते हैं। उन्हें कई बार अल्प विकसति, पिछड़े या गरीब देश भी कहा जाता है। परन्तु अर्थशास्त्री उन्हें विकासशील कहना बेहतर मानते हैं क्योंकि इस शब्द से गतिशीलता का भास होता है। इन देशों में राष्ट्रीय तथा प्रति व्यक्ति आय निम्न होती हैं। इनके कृषि और उद्योग पिछड़े होते हैं, बचत, निवेश और पूंजी निर्माण का स्तर निम्न होता है। यद्यपि इन देशों में निर्यात से आय होती है पर अधिकांशत: ये प्राथमिक और कृषि उत्पाद ही निर्यात कर पाते हैं। संक्षेप में निम्न जीवन स्तर के इन देशों में उच्च शिशु मृत्यु दर, जन्म एवं मृत्यु दरें और स्वास्थ्य, स्वच्छता प्रबंध तथा आधारिक संरचना का स्तर भी निम्न होता है।

2020 के अनुसार भारत का कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP of India 2020) 3.202 ट्रीलियन डॉलर हो गया है। क्रय मूल्य शक्ति (PPP) के अनुसार भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुसार आज भारत अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन के बाद दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। इसमें फ्रांस जैसे शक्तिशाली देश को पीछे छोड़ दिया है।

विकासशील देशों में भारत सबसे तेजी से विकास कर रहा है। यहां की अर्थव्यवस्था उभरती हुई अर्थव्यवस्था कही जाती है क्योंकि अभी यहां पर बहुत ही संभावनाएं बाकी हैं। भारत की अर्थव्यवस्था अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को टककर देती है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं 


1. भारतीय मिश्रित अर्थव्यवस्था India’s Mixed Economy

भारतीय अर्थव्यवस्था, पूर्ण रूप से मिश्रित अर्थव्यवस्था है। सभी निजी और सार्वजनिक क्षेत्र एक साथ यहां मौजूद हैं और कार्य करते हैं। एक तरफ, सार्वजनिक क्षेत्र के तहत कुछ मौलिक और भारी औद्योगिक इकाइयां संचालित की जा रही हैं।

1991 में देश में उदारीकरण किया गया है। विदेशी कंपनियों के लिए देश में फैक्ट्री, उद्योग, धंधे लगाने का दरवाजा खोला गया है। उसके बाद से देश में निजी सेक्टर बहुत तेजी से विकसित हो रहा है। कुछ बुनियादी चीजों जैसे रेलवे, हवाई जहाज, सैन्य हथियारों का निर्माण, रक्षा क्षेत्र से संबंधित उद्योगों में सरकारी सेक्टर को प्राथमिकता दी गई है।

2. भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान Role of Agriculture in Indian Economy

भारतीय में कृषि का सबसे अधिक व्यवसाय है और साथ ही साथ इसकी अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत की 70% आबादी गांव में निवास करती है जो कृषि का काम करती है। भारत की अर्थव्यवस्था पर कृषि का प्रभाव प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से पड़ता है। सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 30% कृषि क्षेत्र से ही प्राप्त होता है।

कृषि को देश की रीढ़ भी कहा जाता है। फलों, सब्जियों, मसालों, वनस्पति तेलों, तम्बाकू, पशुओं के बाल आदि जैसे कृषि उत्पादों का निर्यात किया जाता है, जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि के साथ आर्थिक वृद्धि को भी जोड़ते हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था की बड़ी विशेषता है कि यहां कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच बेहतर संतुलन देखने को मिलता है।

3. कृषि और औद्योगिक क्षेत्र Agricultural and Industrial Area

पहले कृषि का प्रमुख योगदान हुआ करता था क्योंकि औद्योगिकीकरण उस समय कम था। परंतु अब औद्योगिक क्षेत्र मे बहुत तरक्की हुई है। लेकिन ऐसे भी कई व्यापारों को बढ़ावा मिल है जो कृषि के साथ मिल कर काम करते हैं। जैसे पशु आहार या दान बनाने वाली कॉम्पनियाँ, दूध पैकेट बनाने वाली कॉम्पनियाँ, या ऐसी कॉम्पनियाँ जो बाजारों से अच्छी क्वालिटी के फल, सब्जियां खरीद कर उन्हें पैक कर के दोबारा बेचती हैं।


4. तेजी से बढ़ते सेवा क्षेत्र Fast growing service sector

सेवा क्षेत्र में वृद्धि के कारण, भारतीय अर्थव्यवस्था मे बहुत तेजी आई है। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र, बीपीओ, आदि जैसे तकनीकी क्षेत्रों में उच्च वृद्धि हुई है। इन क्षेत्रों में व्यापार ने न केवल अर्थव्यवस्था में योगदान दिया है बल्कि व्यापार को गुना बढ़ाने में भी मदद की है। इन उभरते हुए सेवा क्षेत्रों ने देश को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने में मदद की है जिससे दुनिया भर में भारत अपनी शाखाएं शुरू कर चुका है।

5. उभरती हुए भारतीय बाजार और भारतीय अर्थव्यवस्था Growing Indian Markets

भारतीय अर्थव्यवस्था को उभरती हुई अर्थव्यवस्था कहते हैं क्योंकि अभी यहां बहुत सारे सेक्टर्स का विकास होने लगा है। इसलिए यहां बहुत अधिक संभावनाएं हैं। जबकि विकसित देशों में विकास पूरा हो चुका है और नए विकास की कोई संभावना नहीं है।

अब भारत मे लगभग दुनिया के सभी बड़ी कॉम्पनियाँ और देश अपना निवेश करने लगे हैं। सभी बड़ी कॉम्पनियों के ऑफिस आज भारत मे मौजूद हैं। बड़े-बड़े देश भी अब अपने संसाधन साँझ करके भारत और स्वयं के फ़ायदों को समझने लगें हैं क्योंकि भारत में कम निवेश और जोखिम वाले कारकों की एक उच्च क्षमता है। इसलिए यह दुनिया के लिए एक उभरता हुआ बाजार भी है।

6. तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था Fast growing economy

भारत की अर्थव्यवस्था विश्व में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। 2018 के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था का सकल घरेलू उत्पाद विकास प्रतिशत (Indian Economy growth rate – GDP 2018) 7.3% था। जो विश्व के अन्य देशों की तुलना में काफी अच्छा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि भविष्य में भारत की अर्थव्यवस्था बहुत आगे जाएगी।

7. भारतीय मे तकनीकी का कम उपयोग Lack of Technology

भारतीय अर्थव्यवस्था में तकनीकी का उपयोग कम मात्रा में हो रहा है। मानव जनित श्रम का इस्तेमाल अधिक हो रहा है जिससे वस्तुओं की लागत बढ़ जाती है। विश्व की दूसरी विकसित अर्थव्यवस्थाओं जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन में तकनीक का इस्तेमाल बढ़-चढ़कर किया जाता है। भारत को यदि विश्व में सर्वोच्च स्थान पाना है तो तकनीकी का उपयोग उद्योग धंधों और कृषि में बढ़ाना होगा।


8. असमान धन वितरण Economic Inequalities (Uneven distribution of income in India)

भारत की अर्थव्यवस्था में धन वितरण में असमानता देखने को मिलती है। अमीर और गरीब के बीच बड़ी खाई है। देश में मुट्ठी भर लोगों के पास बड़ी मात्रा में धन है, परंतु बाकी जनता गरीबी की समस्या से जूझ रही है। अमीर लोग और अमीर बनते जा रहे हैं। गरीब और गरीब होता जा रहा है। भारत के 1% जनसंख्या के पास देश का 53% धन है।

इससे समाज में गरीबी के स्तर में वृद्धि हुई है और अधिकतम प्रतिशत व्यक्ति इस प्रकार से गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के नीचे रह रहे हैं। आय के इस असमान वितरण ने भारतीय अर्थव्यवस्था में लोगों की विभिन्न श्रेणियों के बीच भारी अंतर और आर्थिक असमानता पैदा की है।

9. बढ़ती जनसंख्या Increasing Population

मई, 2020 के अनुसार भारत की आबादी 138 करोड़ से अधिक हो चुकी है। जनसंख्या के मामले में भारत चीन के बाद दूसरा बड़ा देश है। बड़ी मात्रा में लोगों को रोजगार देना एक बड़ी चुनौती है।

हालाँकि, इस जनसंख्या में युवाओं युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। जिसके कारण गरीबी और बेरोजगारी में भी बढ़ोतरी हो रही है। अगर जनसंख्या नियंत्रण पर कुछ नियम पारित किये जाए तो अर्थव्यवस्था में चमत्कारिक विकास के परिणाम सामने आ सकते हैं।

10. स्थिर मैक्रो अर्थव्यवस्था Stable Macro Economy

भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया भर में सबसे स्थिर मैक्रो अर्थव्यवस्था माना जाता है। भारत में कारोबार और व्यापार की अच्छी संभावनाएं हैं जिससे बाहरी देश आकर यहां उद्योग धंधे स्थापित कर रहे हैं।  भारत का सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर ( India GDP growth rate 2018) 7.3% है.

11. उचित बुनियादी ढांचे Proper infrastructure

भले ही पिछले कुछ दशकों में बुनियादी विकास में क्रमिक और उच्च स्तर पर सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी उसी की कमी है। देश में औद्योगिक विकास में वृद्धि के कारण बुनियादी ढाँचे में कमी है। जिस दर पर बुनियादी ढांचा बढ़ रहा है उसे विकास प्रक्रिया का समर्थन करने के लिए उचित बुनियादी ढांचे के विकास की आवश्यकता है।

यह भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि में कमी का मुख्य कारण रहा है। बाद में बुनियादी ढाँचे का समर्थन करने से अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी हो गई है, लेकिन निश्चित रूप से उचित बुनियादी ढाँचे के रूप में और विकास के समर्थन की आवश्यकता होगी।

12. भारत मे बेरोजगारी Unemployment in india

भारतीय अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है। देश में 135 करोड़ की आबादी है जिसमें 60% आबादी युवा है और काम करने के योग्य है। पर इसके बावजूद देश में बड़ी मात्रा में बेरोजगारी है। 2017 में भारत में बेरोजगारी (unemployment in india 2017) 1.77 करोड़ थी।

13. बुनियादी ढांचे का अभाव Challenges of infrastructure in india

भारत की अर्थव्यवस्था में बुनियादी ढांचे का अभाव है। पिछले कुछ वर्षों में तेजी से इसमें सुधार किया गया है, पर अभी भी बहुत से क्षेत्रों में बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं है। भारत को यदि विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना है तो बुनियादी ढांचे में सुधार करना होगा। देश के बहुत से हिस्सों में बिजली, पानी, सड़क, सीजर, यातायात के संसाधन, शौचालय, घर जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।


14. मूल्य अस्थिरता Inflation in India

देश में वस्तुओं के मूल्य में अस्थिरता है। आए दिन मूल्य घटता बढ़ता रहता है। मुद्रास्फीति के कारण वस्तुएं महंगी हो रही है। परंतु बेरोजगारी के कारण इसकी मार मध्यम वर्ग और गरीब लोगों पर पड़ रही है।

15. प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल नहीं हो पाया है Under-utilization of natural resources

भारत एक विशाल देश है जहां सभी तरह के प्राकृतिक संसाधन जैसे- जमीन, पानी, खनिज, वन, पेट्रोल, पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। पर इन सभी संसाधनों का सही तरह से इस्तेमाल नहीं हो पाया है।

निष्कर्ष Conclusion

यह सभी बिन्दु भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रमुख विशेषताएं (Features of Indian Economy in Hindi) हैं। भारत विभिन्न आर्थिक समूहों जैसे ब्रिक्स और जी -20 में भी एक सक्रिय सदस्य बन गया है। अब विश्व के सभी दिग्गज देश भारत को व्यापार का एक केंद्र समझ चुके हैं और अपना निवेश जोर-शोर से कर रहे हैं। कोरोना वायरस जैसे मुश्किलों की वजह से भले ही भारत के साथ-साथ दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भारी नुकसान हुआ है। परंतु तब भी भारत अपने अर्थव्यवस्था को सुधारने का सक्षम रखता है।

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