सोलह महाजनपद कौन-कौन से हैं इनके बारे में बताइए - Sixteen Mahajanapadas

वैदिक काल से क्षेत्रीय राज्यों की स्थापना की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी थी । जन ( व्यक्ति अथवा कबीला ) जनपद ( क्षेत्र अथवा भूखंड जहाँ जन निवास करते थे ) में तथा जनपद महाजनपद ( क्षेत्रीय राज्य ) में परिवर्तित हो रहे थे । बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तरनिकाय और जैन ग्रंथ भगवतीसूत्र में निम्नलिखित सोलह महाजनपदों की सूची दी गई है । इन दोनों सूचियों में कुछ अंतर हैं । अधिकतर महाजनपदों का उदय दोआब सहित ऊपरी और मध्य गंगा के मैदान हुआ । इनमें से अधिकांश विंध्य के उत्तर में अवस्थित थे । इन महाजनपदों की राजधानियाँ उस समय के बड़े नगर बन गए । 


1. काशी- इस राज्य की राजधानी बनारस या वाराणसी थी । यह वरुणा और अस्सी नदियों के संगम पर बसा हुआ विख्यात नगर था । काशी राज्य की प्रतिद्वंद्विता कोशल और मगध राज्यों के साथ थी । मगध सम्राट अजातशत्रु ने काशी पर अधिकार कर इसे मगध में मिला लिया । 

2. कोशल - कोशल राज्य पूर्वी उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में विस्तृत था । सरयू नदी द्वारा यह राज्य दो भागों - उत्तरी कोशल और दक्षिणी कोशल - में विभक्त था । उत्तरी कोशल की राजधानी श्रावस्ती थी । बाद में इसे अयोध्या अथवा साकेत में स्थानांतरित किया गया । दक्षिणी कोशल की राजधानी कुशावती थी । कोशल का राजा प्रसेनजित बुद्ध का समकालीन था । अजातशत्रु ने इस राज्य पर अधिकार कर लिया ।

3. अंग - यह राज्य बिहार के मुंगेर और भागलपुर जिलों तक फैला हुआ था । इसकी राजधानी चंपा थी जिसको ख्याति एक विख्यात व्यापारिक केंद्र के रूप में थी । यहाँ का राजा ब्रह्मदत्त था । उसे परास्त कर मगध के राजा बिम्बिसार ने इसे मगध में मिला लिया । 

4. मगध - सोलह महाजनपदों में सबसे अधिक शक्तिशाली राज्य मगध था । इसके अंतर्गत पुराना पटना , गया और शाहाबाद जिलों के क्षेत्र सम्मिलित थे । इसकी पहली राजधानी गिरिव्रज ( राजगृह अथवा राजगीर ) थी ; बाद में राजधानी पाटलिपुत्र ( आधुनिक पटना ) में स्थानांतरित कर दी गई । मगध ने अन्य महाजनपदों पर अपना प्रभाव स्थापित कर लिया एवं साम्राज्य में परिणत हो गया । 

5. वृज्जि ( वज्जि ) - गंगा नदी के उत्तर बिहार के तिरहुत प्रमंडल में वृज्जि गणराज्य था । यह आठ गणों का संयुक्त राज्य ( संघ ) था जिसमें सबसे अधिक प्रभावशाली लिच्छवी थे । वज्जिसंघ और लिच्छवियों की राजधानी आधुनिक वैशाली जिलांतर्गत वैशाली नगर थी जिसकी पहचान बसाढ़ एवं इसके निकटवर्ती ग्राम समूह से की गई है । मगध के शासक अजातशत्रु ने इसे युद्ध में परास्त कर अपने राज्य में मिला लिया ।

6.मल्ल - वज्जि के समान मल्ल भी एक गणतांत्रिक राज्य था । यह राज्य दो भागों में बँटा हुआ था । एक की राजधानी कुशीनारा ( कसिया , जिला देवरिया , उत्तर प्रदेश ) और दूसरे की पावा ( जिला गोरखपुर , उत्तर प्रदेश ) थी । यह राज्य भी मगध साम्राज्यवाद का शिकार बना । 

7. चेदि - यह राज्य यमुना नदी के किनारे बुंदेलखंड क्षेत्र में बसा हुआ था । इसकी राजधानी सोत्थिवती थी । चेदियों का विख्यात राजा शिशुपाल हुआ जिसका उल्लेख महाभारत में मिलता है ।

8 वत्स - वत्स राज्य भी यमुना नदी के किनारे फैला हुआ था । इसकी राजधानी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद के निकट कोसम ( कौशांबी ) थी । यहाँ बुद्ध का समकालीन राजा उदयन था । वत्स और अवंति राज्य एक - दूसरे के प्रतिस्पर्धी थे ।

 9. कुरु - यह राज्य दिल्ली - मेरठ क्षेत्र में अवस्थित था । इसकी राजधानी इंद्रप्रस्थ ( दिल्ली , पुराना किला के निकट ) थी । महाभारत में कुरु राज्य और इसकी राजधानी का वर्णन मिलता है ।

 10. पांचाल - पांचाल राज्य दो भागों में विभक्त था । उत्तरी पांचाल की राजधानी अहिच्छत्रा ( बरेली , उत्तर प्रदेश ) और दक्षिणी की कांपिल्य ( फर्रुखाबाद , उत्तर प्रदेश ) थी ।  

11. सूरसेन - यह राज्य यमुना नदी के तट पर बसा हुआ था । इसकी राजधानी मथुरा थी । इसकी ख्याति एक धार्मिक एवं व्यापारिक नगर के रूप में थी । यहाँ यदुओं अथवा यदुवंशियों का शासन था । मथुरा के साथ कृष्ण का भी नाम जुड़ा हुआ है । बुद्ध के समकालीन अवंतिपुत्र सूरसेन के राजा थे । 

12. मत्स्य - आधुनिक राजस्थान के भरतपुर , जयपुर और अलवर जिले इस राज्य में सम्मिलित थे । इस राज्य की राजधानी बैराट या बिराटनगर थी । 

13. अश्मक ( अस्सक ) - यह राज्य महाराष्ट्र में आधुनिक पैठन ( प्रतिष्ठान ) के निकट गोदावरी तट पर स्थित था । पैठन अंतर्देशीय व्यापार का एक विख्यात केंद्र था । इस राज्य की राजधानी पोतन थी । इस राज्य का अवंति से संघर्ष होता रहता था । 

14. अवंति – मध्य भारत का यह सबसे अधिक शक्तिशाली राज्य था । यह राज्य भी दो भागों में विभक्त था । उत्तरी अवंति की राजधानी उज्जयिनी एवं दक्षिणी की माहिष्मती थी । उज्जयिनी प्रमुख व्यापारिक मार्ग ( स्थल मार्ग ) पर बसी हुई थी इसलिए इसका महत्त्व बहुत अधिक था । अवंति का विख्यात राजा चण्डप्रद्योत था । पहले इसकी शत्रुता वत्सराज उदयन से थी , परंतु बाद में दोनों में पारिवारिक संबंध बन गए । मगध से अवंति की मित्रता थी । मगधराज बिम्बिसार ने प्रद्योत की चिकित्सा के लिए अपने विख्यात वैद्य जीवक को राजगीर से यहाँ भेजा था ।  

15. गांधार - गांधार राज्य काबुल घाटी में अवस्थित था । इसकी राजधानी तक्षशिला थी । यह व्यापार का केंद्र था । इसकी ख्याति शैक्षणिक केंद्र के रूप में भी थी । यहाँ का विख्यात राजा पुष्करसारिन था । गांधार और अवंति में संप्रभुता के लिए संघर्ष चलता रहता था । 

16. कंबोज - यह गांधार का पड़ोसी राज्य था जो मध्य एशिया के पामीर क्षेत्र में ( आधुनिक तजाकिस्तान ) में अवस्थित था । राज्य की राजधानी हाटक या राजपुर थी ।

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